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SPERMATORRHOEA (DHATU ROG) TREATMENT धात रोग लक्षण कारण एवम् बहोत आसान है इसका इलाज

Spermatorrhea is a condition of excessive, involuntary ejaculation. Dhat describes a condition of semen release during urination or bowling movement. In Ayurvedic Medicine, Ashwagandha and Bala are used to treat this vata ailment.

Ayurvedic Treatment for Dhat for safe male factor strengthening

Semen comprises of essential proteins so its regular release may result into weakness, lack of sex desire and the overall weakness of body. Additionally dhat also causes difficulty in penis erection.

Common causes of Dhat problem
Thin Semen– Semen is very thin that men feel difficulty in holding it. The ejaculation occurs immediately as of erection or within two to three minutes during sexual interaction. If the treatment is not taken, the semen begins releasing with urine as well as stool.

Weak penile muscles– There are several causes of weak penile muscles such as frequent masturbation, injury or diseases, due to this condition, male become unable to hold discharge. In this case, the semen discharges as soon as the penis becomes erect.

For the treatment of Dhat condition, two types of procedures are followed:

Thicken semen
Strengthen the penile muscles
The treatment is purely and 100% provided by herbal medicine. The medicines are not chemical in fact these are the herbs.

The herbs offer the necessary elements to improve your sexual stamina as well as strengthen the body. The herbs are specifically chosen depending on the cause of disease.

The herbs improve the blood circulation and strengthen the penile muscles
The herb powders increase the testosterone levels to increase your strength and male factor.
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So the dhat condition is overall corrected by using the herbal medicine to treat the main cause of this problem.

धात रोग क्या है – बहोत आसान इसका इलाज – Spermatorrhoea
धातु (धात) रोग (dhat rog, Spermatorrhoea)?
धातु रोग का मतलब होता है, वीर्य का अनैच्छिक रूप से निकलना, जो आम तौर पर नींद के दौरान या अन्य परिस्थितियां जैसे पेशाब या मल त्याग के दौरान होता है।

यह एक पुरुषों की यौन समस्या है, जिसमें अनैच्छिक रूप से वीर्यपात (वीर्य रिसना या बहना) होने लगता है, जो आमतौर पर यौन उत्तेजना और संभोग के बिना होता है।

धातु रोग – लक्षण कारण एवम् उपचार !

धातुरोग का डर वर्षों से पुरुषों के मन में बैठ हुआ है और आज भी इसका मुख्य कारण है कामविज्ञान की पूरी शिक्षा का आभाव | शर्म के कारण कोई भी एक दूसरे से बात करने से शर्माता हैं | उपर से नीम-हकीमों ने इतनी ग़लत धारणाएँ फैला रखी हैं कि पुरुषो के मन में धातुरोग का दर पूरी तरह से बैठ गया है |

इसी डर का लाभ उठाकर विभिन्न नीम हकीम अपने पास आनेवाले रोगी को प्राय: धातुरोग बताकर अच्छा ख़ासा पैसा वसूल कर लेते हैं | इसी विषय को मान में रखकर यह लेख लिखा गया है |

धातुरोग के बारे में बताने से पहले धातु (वीर्य) के बारे में जानकारी देना ज़्यादा ज़रूरी हैं | आयुर्वेद के अनुसार मानव शरीर सात धातुओं से बना है | रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा व शुक्र धातु (वीर्य) | जो भी खाना पीना हम खाते हैं उससे पहले रस बनता है फिर बाकी धातुएँ तो जितना पौष्टिक हमारा आहार होगा उतनी ही पुष्ट धातु बनेगी एवम् हमारा शरीर भी उतनाही, पुष्ट बनेगा | परंतु अगर किसी कारण से यह धातु शरीर से निकलने लगे तो हमारा शरीर भी उतना ही कमजोर होता जाएगा |

  • धातु रोग परिचय :-

मैथुन की इच्छा के बिना जब पुरुष मल अथवा मूत्र का त्याग करते हैं उस समय कभी कभी या हमेशा उनकी इंद्रिय में से एक पानी जैसा तरल अथवा पतले दूध जैसा अथवा कच्ची लस्सी जैसा परंतु चिपचिपा पदार्थ निकलता है तो इसे धातु रोग कहा जाता है | इसे वीर्यप्रमेह, प्रेमह, शुक्रमेह, जिरयान एवम् Spermatorrhoea आदि नामों से भी जाना जाता है |

  • धातुरोग का कारण :-

आयुर्वेद के प्रसिद्ध ग्रंथ भैषज्य रत्नावली के अनुसार योडवशी कुरूते मुढ़ोसविधिना रेतस:क्षयम् |
अर्थात जो मूर्ख पुरुष अपने मन को वश में नही रख पाता इसलिए अत्याधिक हस्तमैथुन करता है अथवा अन्य कारणों से जैसे कि पशुमैथुन, वेश्यागमन, मुखमैथुन अथवा ज़्यादा मैथुन करके वीर्य नाश करता है उसे यह शुक्रमेह (धातुरोग) हो जाता है |
कभी कभी आहार विहार के दूषित होने से, ज़्यादा देर बैठे रहने से, ज़्यादा सोने से, ज़्यादा मिर्च, खट्टे पदार्थ, तीखे पदार्थ के सेवन से, पाचनशक्ति की कमज़ोरी से, ज़्यादा सिगरेट, बीड़ी, तंबाकू, चरस, गांजा, माँसाहार, दारू इत्यादि के सेवन से (जिससे कि शरीर में वात एवम् पित्त बढ़ जाता है) इसके अलावा हमेशा सैक्स संबंधी विचारों को सोचते रहना, उत्तेजक एवम् गर्म पदार्थों का ज़्यादा सेवन करना, वीर्य में गर्मी ज़्यादा होना, वीर्य का पतला होना, वीर्य का ज़्यादा मात्रा में बनना, वीर्य की थैली में दोष होना, अत्याधिक स्वप्नदोष होना, पेट में कृमि (कीड़े) होना, ज़्यादा देर तक संभोग न करना, कब्ज का होना, एवं इंद्रिय पर खुजली का होना भी धातुरोग को उत्पन्न करता है |

  • धातुरोग के रोगी के सामान्य वचन :-

धातुरोग से परेशान पुरुष प्राय यही कहते हैं की डॉक्टर साहब जब भी पेशाब करने जाता हूँ या मलत्याग करने जाता हूँ तो इंद्रिय में से चिपचिपा सा पदार्थ निकलता है जिससे इंद्रिय में शिथिलता आ जाती है | पेशाब में थोड़ी थोड़ी जलन होती है तथा इंद्रिय में दर्द भी होता है | भूख नहीं लगती, शरीर नही बनता, कुछ भी खाओ शरीर को नहीं लगता | गाल पिचक गये हैं | आँखे अंदर घँस गयी हैं | स्मरणशक्ति कमजोर हो गई है | चक्कर आते हैं | नींद नही आती, मन में घबराहट रहती है, मन उदास रहता है, किसी भी काम में मन नहीं लगता, जोड़ों में, शरीर में दर्द रहता है | उत्तेजना भी कम होती है और कभी अगर संबंध बनाने की कोशिश करते हैं तो शीघ्रपतन हो जाता है एवम् आकार भी कम हो गया लगता है |

प्राय: यह देखा जाता है कि धातु रोग के रोगी अत्यंत उदास एवम् उत्साहहीन रहते हैं उन्हें लगता है कि अभी उनकी सारी शक्ति नष्ट हो चुकी है अथवा नष्ट होती जा रही है एवम् वो विवाह के अथवा पत्नी के काबिल नहीं रहे |

परंतु ऐसा वास्तव में नहीं होता | आम रोग की तरह यह भी एक रोग है एवम् चिकित्सा लेने पर ठीक हो जाता है इसमे कुछ परेशान होने की या घबराने की ज़रूरत नहीं है |

  • धातुरोग एवम् भ्रम :-

  1. कभी कभी पुरुष जब सैक्स संबंधी विचारों में खोये रहते हैं तो इंद्रिय में से चिपचिपा तरल पदार्थ निकलता है | इसे धातु रोग नहीं समझना चाहिए | यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है परंतु अगर यह तरल पदार्थ ज़्यादा मात्रा में निकलता है एवम् जल्दी ही निकल आता है तो यह शीघ्रपतन की निशानी भी हो सकता हैं |
  2. मूत्र में से निकलने वाला हर पदार्थ धातु (वीर्य) नही होता कभी कभी मूत्र में फोस्फेट, कैल्शियम, प्रोटीन, पस सेल भी पाए जाते हैं | इसलिए मूत्र की जाँच करवा लें |
  3. कभी कभी पेट खराब होने पर, कब्ज होने पर हम मलत्याग के समय ज़ोर लगाते है तो वीर्य निकल जाता है | यह कब्ज होने की वजह से होता है | अगर ऐसा कभी होता है तो इसे भी धातु रोग न समझे बल्कि पेट का इलाज करवाए | परंतु अगर हाँ बार बार मुलत्याग करते समय वीर्य निकलता है तो डॉक्टर से परामर्श ज़रूर करें |

  • धातुरोग की चिकित्सा :-

ज़्यादा हस्तमैथुन, मैथुन, वीर्यनाश न करें, सैक्स संबंधित विचारों का ज़्यादा चिंतन न करें | ज़्यादा माँस, मच्छी, अन्डे न खाए | ज़्यादा तीखी, मसाले वाली गर्म चीजोन से परहेज करें | पेट सॉफ रखें, कब्ज न होने दें, ज़्यादा करके फलाहार एवम् शाकाहार लें | पानी ज़्यादा पिये | ठंडी चीजो का ज़्यादा सेवन करें, नशों से बचे |

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यह समस्या अक्सर रोगी के चिड़चिड़ेपन व उसके यौन अंगों में दुर्बलता से जुड़ी हुई होती है। कुछ प्रकार के मामलों में कब्ज के दौरान मल त्याग करने के लिए लगाए गए के कारण भी मूत्र के साथ वीर्य जैसा निकलने लगता है। कुछ मामलों में वीर्य मूत्र से पहले निकल जाता है, या मूत्र से मिलकर भी निकलने लग जाता है।

धातु (धात) रोग के लक्षण – Spermatorrhoea Symptoms
धातु रोग के लक्षण व संकेत क्या हो सकते हैं? धात गिरने की समस्या रोग के मुकाबले एक लक्षण ज्यादा होता है। यदि समस्या अत्यधिक हस्तमैथुन या सेक्स के कारण होती है, तो दीर्घकालिक यौन क्रीड़ा थकान से संबंधित लक्षण दिखाई दे सकते हैं:

कमर में दर्द विशेष रूप से कमर के निचले भाग में
कमर के निचले भाग में दर्द जिसकी दर्द की तरंगें नीचे तक जाएँ
अंडकोष या पेरिनियम में दर्द,
चक्कर आना,
सामान्य कमज़ोरी,
रात को पसीना आना,
अंडकोष क्षेत्र में पसीना आना,
गर्म और नम त्वचा,
गर्म और नम हथेलियां और तलवे
और पढ़ें – लिंग में तनाव की कमी

धातु (धात) रोग के कारण – Spermatorrhoea Causes
धातु रोग के कारण और इसमें अन्य समस्याएँ क्या हैं?

धातु रोग के मुख्य कारण ये हैं:

पुरूष जननांग टेस्टेस (वृषण) को बाकी शरीर के तापमान से कुछ हद तक ठंडा रखना चाहिए। जब टेस्टेस अधिक गर्मी के प्रभाव में आते हैं, (जैसे गर्म पानी के टब में नहाने के बाद) ऐसे में रात को सोने के बाद शुक्राणु निकालने लगते हैं, क्योकिं शुक्राणु की सप्लाई क्षतिग्रस्त हो जाती है।।
यौन उत्तेजनाओं को प्रभावित करने वाला दृश्य या ख्याल आने पर भी इस समस्या का पैदा होना लाज़मी है।
खारब आहार भी इस समस्या का एक कारण है। कम प्रोटीन युक्त आहार, या बिना अंडे वाले आहार का सेवन करना भी लाभदायक साबित हो सकता है।
अत्याधिक हस्तमैथुन या सेक्स करना भी धातु रोग का कारण बन सकता है।
धात का रोग कमजोर पाचन तंत्र या शारीरिक कमजोरी के कारण भी हो जाता है।
इसके अलावा, अधिकांश पूर्वी शहर, वेस्टर्न शौचालय (पश्चिमी प्रकार के शौचालयों) से रहित हैं। उनके शौचालय जमीन पर लगाए जाते हैं क्योंकि पुरुषों को उन पर उकड़ू बैठने (squat) की आवश्यकता पड़ती है। इस अवस्था में जब मल त्याग करने के लिए अत्याधिक जोर लगाया जाता है, तो वीर्य अपने आप निकलने लगता है। अगर वीर्य निकलने की समस्या रोजाना होने लगे तो यह एक गंभीर स्थिति हो सकती है।
आदमी को अपने दैनिक मल क्रिया से पूरी तरह से पेट साफ कर सकता है।
तंत्रिका तंत्र की कमजोरी।
मूत्र और जननांग अंगों की क्षीणता।
अत्याधिक हस्थमैथुन करने की आदत।
यौन असंतोष।
त्वचा आदि की समस्या के कारण वृषण कोष संबंधी समस्याएं।
संकीर्ण (तंग) मूत्र निकास मार्ग।
मलाशय के विकार जैसे बवासीर, एनल फिशर, कीड़े और त्वचा में फोड़े फुंसी आदि।
मूत्राशय भरना।
टेस्टोस्टेरोन पर आधारित दवाएं।
गद्दे या कंबल के साथ संपर्क (रगड़) के कारण उत्तेजना।

धातु (धात) रोग का इलाज – Spermatorrhoea Treatment

जानें की धातु रोग का उपचार कैसे किया जा सकता है ?

सफल उपचार के लिए धातरोग की पैथोलोजी जाँच होना जरूरी होता है।
एक अच्छी तरह से संतुलित, पौष्टिक आहार खाएं।
शराब आदि से दूर रहें,
रात के समय कम खाना खाएं,
बिस्तर छोड़ने के बाद मूत्र त्याग करें।
थोड़े कठोर गद्दों पर सोने की कोशिश करें।
रात को सोते समय चिपके कपड़ों का इस्तेमाल ना करें।
सुबह (ब्रह्म मुहूर्त में) जल्दी उठने की कोशिश करें, यह वीर्यपात की समस्या आम तौर पर सुबह के समय ही होती है।
विवेकपूर्ण विचारों में ध्यान लगाने की बजाए अपनी एनर्जी तथा क्षमता को रचनात्मक और निर्माणकारी कार्यों में लाने की कोशिश करें।
पेट सॉफ रखने की कोशिश करें ताकि बवासीर और अन्य गुदा संबंधी विकारों की जांच की जा सके।
जननांगों को पूर्ण तरीके से सॉफ सुथरा रखें, ताकी जलन और उसके कारण होने वाले अनैच्छिक वीर्यपात की जांच की जा सके।

धातु रोग के इलाज के लिए कीगल एक्सरसाइज करें –

जब आप जान लेते हैं कि कौनसी मांसपेशी को टारगेट करना है, तब कीगल एक्सरसाइज (Kegel Exercise) करने में काफी आसान हो जाती है। यह पेशाब के दौरान अपनी मांसपेशियों का पता लगाने के सबसे आसान तरीका है –

आधा पेशाब त्याग करने के बाद बाकी के पेशाब को रोकने या धीरे-धीरे करने की कोशिश करें।
अपने नितंबों, टांगों या पेट में मांसपेशियों में तनाव या खींचाव उत्पन्न ना करें, और ना ही अपनी सांसों को रोकने की कोशिश करें।
जब आप अपने मूत्र की धारा को धीमा या बंद करने में सफल हो जाते हैं, तो आप उस मांसपेशी पर नियंत्रण पा लेते हैं।
यदि क़ब्ज़ की समस्या हुई है तो उसका पता जल्द से जल्द लगा लिया जाना चाहिए और उसका ईलाज भी कर दिया जाना चाहिए।

कीगल व्यायाम करने के लिए –

5 तक धीरे-धीरे गिनती करें, और अपने इन मांसपेशियों को सिकोड़ें।
और फिर ऐसे ही 5 गिनते हुऐ धीरे-धीरे वापस खोलें।
इस प्रक्रिया को 10 बार करें।
10 बार केगल के सेट को दिन में कम से कम 10 बार करें।

धातु (धात) रोग के डॉक्टर:
If You Want Any Type of treatment Regarding to Spermatorrhoea you may directly contact to

Dr. Rai Ayur & Unani Clinic (Best & Top Sexologist Doctor in Kanpur)

Contact us on +91-9453141421, 091617 00099

Email us: droryayurclinic@gmail.com

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