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INFERTILITY DIAGNOSIS AND TREATMENT (बांझपन) – Dr. Roy Ayur Clinic World Best & Top Sexologist



If you and your partner are struggling to have a baby, you’re not alone. Infertility is defined as not being able to get pregnant despite having frequent, unprotected sex for at least a year for most couples.

The cause of infertility may be difficult to determine but may include inadequate levels of certain hormones in both men and women, and trouble with ovulation in women.

Infertility may result from an issue with either you or your partner, or a combination of factors that prevent pregnancy. Fortunately, there are many safe and effective therapies that significantly improve your chances of getting pregnant.


The main symptom of infertility is not getting pregnant. There may be no other obvious symptoms. Sometimes, a woman with infertility may have irregular or absent menstrual periods. In some cases, a man with infertility may have some signs of hormonal problems, such as changes in hair growth or sexual function. Most couples will eventually conceive, with or without treatment.

When to see a doctor

You probably don’t need to see a doctor about infertility unless you have been trying regularly to get pregnant for at least one year. Women should talk with a doctor earlier, however, if they:

Are age 35 or older and have been trying to conceive for six months or longer
Are over age 40
Have irregular or absent periods
Have very painful periods
Have known fertility problems
Have been diagnosed with endometriosis or pelvic inflammatory disease
Have had multiple miscarriages
Have undergone treatment for cancer
Men should talk to a doctor if they have:

A low sperm count or other problems with sperm
A history of testicular, prostate or sexual problems
Undergone treatment for cancer
Small testicles or swelling in the scrotum
Others in your family with infertility problems
Causes of male infertility

These may include:

Abnormal sperm production or function due to undescended testicles, genetic defects, health problems such as diabetes, or infections such as chlamydia, gonorrhea, mumps or HIV. Enlarged veins in the testes (varicocele) also can affect the quality of sperm.
Problems with the delivery of sperm due to sexual problems, such as premature ejaculation; certain genetic diseases, such as cystic fibrosis; structural problems, such as a blockage in the testicle; or damage or injury to the reproductive organs.
Overexposure to certain environmental factors, such as pesticides and other chemicals, and radiation. Cigarette smoking, alcohol, marijuana, anabolic steroids, and taking medications to treat bacterial infections, high blood pressure and depression also can affect fertility. Frequent exposure to heat, such as in saunas or hot tubs, can raise body temperature and may affect sperm production.
Damage related to cancer and its treatment, including radiation or chemotherapy. Treatment for cancer can impair sperm production, sometimes severely.
Causes of female infertility

Causes of female infertility may include:

Ovulation disorders, which affect the release of eggs from the ovaries. These include hormonal disorders such as polycystic ovary syndrome. Hyperprolactinemia, a condition in which you have too much prolactin — the hormone that stimulates breast milk production — also may interfere with ovulation. Either too much thyroid hormone (hyperthyroidism) or too little (hypothyroidism) can affect the menstrual cycle or cause infertility. Other underlying causes may include too much exercise, eating disorders or tumors.
Uterine or cervical abnormalities, including abnormalities with the cervix, polyps in the uterus or the shape of the uterus. Noncancerous (benign) tumors in the uterine wall (uterine fibroids) may cause infertility by blocking the fallopian tubes or stopping a fertilized egg from implanting in the uterus.
Fallopian tube damage or blockage, often caused by inflammation of the fallopian tube (salpingitis). This can result from pelvic inflammatory disease, which is usually caused by a sexually transmitted infection, endometriosis or adhesions.
Endometriosis, which occurs when endometrial tissue grows outside of the uterus, may affect the function of the ovaries, uterus and fallopian tubes.
Primary ovarian insufficiency (early menopause), when the ovaries stop working and menstruation ends before age 40. Although the cause is often unknown, certain factors are associated with early menopause, including immune system diseases, certain genetic conditions such as Turner syndrome or carriers of Fragile X syndrome, and radiation or chemotherapy treatment.
Pelvic adhesions, bands of scar tissue that bind organs that can form after pelvic infection, appendicitis, endometriosis or abdominal or pelvic surgery.
Cancer and its treatment. Certain cancers — particularly reproductive cancers — often impair female fertility. Both radiation and chemotherapy may affect fertility

बांझपन के लक्षण, कारण, इलाज, दवा, उपचार जानिए डॉक्टर Dr. Rai Ayur & Unani Clinic (Best & Top Sexologist Doctor in Kanpur)-
निसंतान होना कोई अभिशाप नहीं है आज के युग में जो दंपत्ति इस समस्या से जूझ रही है वे भी आधुनिक विधि यों के द्वारा संतान सुख की प्रापति कर सकती है। एक वैवाहिक जोड़े को लग भंग एक साल के आपसी सम्भोग के बाद संतान सुख की प्रापति हो जानी चाहिए। यदि उसको संतान सुख की प्रापति नहीं होती तो उसे डॉक्टरी सलाह ज़रूर ले लेनी चाहिए। देखा गया है क कई बार डॉक्टर सलाह पहले भी ले लेनी चाहिए जैसे कि एक कपल की शादी लेट हुयी है या वाइफ की उम्र ज़्यादा है या कोई वाइफ को महामारी में प्रॉब्लम है या हस्बैंड को कोई प्रॉब्लम आ रही है।
जब एक महिला नियमित रूप से 12 महीने या इससे अधिक समय तक असुरक्षित संभोग करने के बाद भी प्रेग्नेंट होने में असमर्थ होती है तो यह महिला बांझपन की स्थिति हो सकती है।
बांझपन के इलाज के लिए डॉक्टर महिला की मेडिकल हिस्ट्री दवाओं यौन इतिहास और यौन गतिविधि का विश्लेषण करते हैं। डॉक्टर यह सुनिश्चित करते हैं कि महिला नियमित रूप से ओव्युलेट करती है और उसके ओवरीज़ अंडे रिलीज़ करते हैं। इसके बाद हार्मोन के स्तर को मापने के लिए रक्त परीक्षण (blood test) किया जाता है। गर्भाशय और फैलोपियन ट्यूब की जांच करने के लिए अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे परीक्षण द्वारा अंडाशय (ovaries) और गर्भाशय (uterus) की जांच की जा सकती है।

महिलाओं में बांझपन के लक्षण, 

औरतों में बाँझपन की समस्या का प्रमुख कारण है ट्यूबों का बंद होना अंडा न बनना या फिर बच्चेदानी में नुक्स होना , रसोलियाँ होना या फिर बचे दानी का साइज छोटा होना।

ट्यूबों बंद होने के कई कारण हो सकते हैं 

जैसे के ट्यूबों नलो की टुबरक्लोसिस के कारण बंद हो सकती हैं या जब लेडी को इन्फेक्शन होती है जिसको हम पेल्विक इन्फ्लैमटिक डिजीज कहते हैं उसके कारण भी ट्यूबों बंद हो सकती है, जब लेडी के रेपेटेड एबॉर्शन और रेपेटेड गर्भपात होता है तो उसके बाद भी इन्फेक्शन के कारण ट्यूबों बंद हो सकती हैं। अंडेदानी की जो समस्या है उसमें जो प्रमुख कारण है वो है क जब अंडा नहीं बनता या अंडा जब बनता है तब पूरी तरह से विकसित नहीं होता या फिर अण्डेदानिया ही फैल हो जाती हैं वो अंडा नहीं बना पाती। दूसरा’ जो कारण है अंडेदानी का वो है अंडेदानी में रसोलियाँ होना , जो की खून की भी हो सकती है जिसको हम एन्ड्रोमेट्रोटिस्टिक बोलते हैं या फिर पानी की रसोलियाँ होना।

बच्चेदानी का जो कारण है जिसके कारण एक लेडी को बचा नहीं ठहर सकता उसमें है फ़िब्रोस जिसको हम रसोलियाँ बोलते हैं दूर कारण है बचेदानी का जो साइज है छोटा है बचे दानी की तह जो है वो कमजोर है और बच्चे नहीं पकड़ सकती। फिर जो कारण हो सकता है बच्चे दानी के मुँह पे सोजज है इन्फेक्शन है सर्विकल रसोलियाँ भी बोलते हैं और इस इन्फेक्शन के कारण बच्चा नहीं ठहर सकता।

जब भी एक निरसंतान जोड़ा हमारे पास आता है दोनों हस्बैंड वाइफ के टेस्ट किए जाते हैं। सबसे पहल जो आदमी के टेस्ट किये जाते हैं वो हैं सीमेन एनालिसिस इसमें देखा जाता है हस्बैंड के स्पर्म कितने हैं क्या स्पर्म फ़ंक्शन्सेस्ट किये जाते हैं जिसको कोई इन्फेक्शन तो नहीं जिसको हम सीमेन कल्चर करते हैं। यदि कोई सीमेन में प्रॉब्लम ए यानी क कोई स्पर्म कम है या बिलकुल भी नहीं है तो फिर एक आदमी के और भी टेस्ट किये जाते हैं देखा जाता है की स्पर्म क्यों ही बन रहे इसके एक आदमी के हॉरमोन एनालिसिस किये जाते हैं उसके बाद गोलियों की स्कैनिंग की जाती है और अंदर से भी पानी निकल के देखा जाता है स्पर्म अंदर बन रहे हैं या बिलकुल भी नहीं अंदर से भी स्पर्म बन रहे। और जाने की कोई ब्लाक है क नहीं है।

एक लेडी के जो टेस्ट किये जाते हैं सबसे पहले बेस लाइन स्कैन किया जाता है जिसमें हम देखते हैं क उसकी बच्चेदानी ठीक है उसकी लाइनिंग ठीक है अंडेदानी की कोई समस्या तो नहीं है , फिर उसके बाद लेडी के होर्मोनेस टेस्ट किये जाते हैं जिनमें हमें जिनसे हमें पता लगता क उसकी अंडे बनने की क्षमता क्या है या उसको कोई थाइरोइड की प्रॉब्लम तो नहीं या और कोई हार्मोनल समस्या तो नहीं।

महिलाओं में बांझपन के लक्षण yt thumb nail

फिर लेडी की ट्यूबों की जाँच की जाती है , जो ट्यूबों जाँच है वो तीन तरह से की जाती है।
एक तो हम एक्सरे के ज़रिया क्र सकते हैं जिसको हम हिस्ट्रोसैपिंगोग्राफी कहते हैं।
दूसरा जो है उसको हम अल्ट्रासाउंड के ज़रिये जिसको हम सोनोसानपिंगोग्राफी कहते हैं।
तीसरा जो हम एक लेडी के पेट में दूरबीन डाल के किया जाता है।
इन टेस्ट के बाद देखा जाता है लेडी की कोई इन्फेक्शन तो नहीं है बच्चेदानी के मुँह पे जिसको हम कॉल्पोस्कोपिक टेस्ट कहते हैं। और उसका पानी ले के भी जांच की जाती है।

कई बार देखा गया है कि एक दंपति हमारे पास आती है तो उन दोनों के टेस्ट हुए होते हैं काफी सरे टेस्ट हुए होते हैं, और उनमें कोई प्रॉब्लम नहीं आती पर फिर भी वो संतान सुख प्राप्त नहीं कर सकते उन केसेस में ज्यादातर ऐसे टेस्ट किये जाते हैं जिनको हम एंटी स्पर्म एंटी बाड़ी कहते हैं जब एक आदमी का स्पर्म और उनकी लाइफ के अंडे का मिलन नहीं हो पाता, बॉडी में एंटी बॉडीज बनती हैं जो कि प्रेगनेंसी नहीं होने देती।

आज के युग में वो आदमी भी संतान सुख की प्राप्त कर सकता है जिनको संतान सुख की समस्या हो , जिसमें स्पेर्म्स काम हो या फिर स्पेर्म्स बिलकुल भी नहीं हो। ऐसे केसेस के लिए एक स्पेशल विधि आती है जिसको हम इक्क्सीविधि कहते हैं, ये उन पेशेंट्स की लिए उसे की जाती है जिनमें हमने इक्क्सी करनी हैं जिनमें स्पर्म नहीं है। जिसमें कि एक आदमी के स्पर्म उन्चारश से निकले जाते हैं और एक अंडे और एक स्पर्म का मिलान माइक्रोस्कोप के नीचे किया जाता है, और 48-72 घंटे के बाद ब्लूम बना के लेडी के बच्चेदानी में रखा जाता है।

इस विधि को इक्क्सी विधि कहते हैं और इस से जिस आदमी के स्पर्म बिलकुल कम है या बिलकुल ही नहीं बाहर आ रहे जिसको हम ब्लॉक्ड भी कहते हैं वह भी अपने स्पर्म से संतान सुख की प्रापति कर सकता है।

जब एक लेडी की ट्यूब बंद होती हैं तो अंडे और स्पर्म का मिलन नहीं हो सकता और प्रेगनेंसी नहीं होती ऐसे केसेस में या तो हम ये तुबेस खोलते हैं या फिर टेस्ट ट्यूब विधि द्वारा जिसको हम आयी. वी. ऍफ़ द्वारा प्रेगनेंसी कर सकते हैं, ऐसे केसेस में एक लेडी को इंजेक्शंस दिए जाते हैं जो के पीरियड्स के दूसरे दिन से शुरू किये जाते हैं और अंडे बनाये जाते हैं जब ये अंडे विकसित हो जाते हैं तो ये अंडे अल्ट्रा साउंड के ज़रिये बाहर निकले जाते हैं मशीन द्वारा निकले जातें हैं, और फिर जो काम ट्यूब में होना है यानी के अंडे और स्पर्म का मिलन वो एक IVF लेबोरेटरी में किया जाता है।

अधिक जान करि के लिए संपर्क करे: +91-884-724-4122

डॉक्टर से निम्न स्थितियों में मिलें :
* आप 35 वर्ष से कम उम्र की हैं और गर्भवती होने के लिए एक साल से अधिक समय से असुरक्षित सेक्स कर रही हैं।
* आपकी उम्र 40 से अधिक है और गर्भवती होने के लिए लगातार छह महीने से सेक्स कर रही हैं।
* आपके दो या अधिक लगातार गर्भपात हुए हैं।
* आपको एंडोमेट्रियोसिस या ब्लॉक या स्कार्ड फैलोपियन ट्यूब के लिए माइक्रोसेर्जरी (microsurgery) या उपचार (treatment) की आवश्यकता है।
* आप और आपका साथी गर्भाधान करने के लिए इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ), गैमेट इंट्राफॉलोपियन ट्रांसफर (जीआईएफटी), या अन्य प्रजनन विधियों पर विचार कर रहे हैं। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि महिलाओं के लिए प्रजनन विशेषज्ञ आमतौर पर प्रजनन संबंधी एंडोक्रिनोलॉजिस्ट (reproductive endocrinologists) होते हैं जो प्रजनन को प्रभावित करने वाले हार्मोनल विकारों के विशेषज्ञ होते हैं।
“निष्कर्ष = Conclusion = Nishkarsh”,
“गर्भवती होने की अक्षमता से निपटना बहुत मुश्किल होता है और ये जीवन के हर पहलू को प्रभावित कर सकता है।
महिला बांझपन के कई कारण हो सकते हैं। फ़ीमेल इंफर्टिलिटी के कुछ कारणों का निदान हो सकता है वहीं कई इनके कारणों का पता लगाना बेहद मुश्किल हो जाता है।
आज के दौर में कई उपचारों की मदद से इस समय का समाधान किया जा सकता है।

पुरुष बांझपन के कारण और उपचार
पुरुष बांझपन के महिलों की उपेक्षा बहुत कम कारक होते है | महिलाओं में बांझपन के बहुत कारक हो सकते है , क्यूंकि प्रजनन का जायदा हिस्सा महिला की और से किया जाता है | जबकि पुरुष में सिर्फ तीन ही कारण हो सकते है क्यूंकि प्रजनन में पुरुष का हिस्सा बहुत कम् होता है|

पहला तो यह है की पुरुष के वीर्य में शक्राणुओं की उपलब्धता बहुत कम है , या आप यु कह सकते है की पुरुष प्रजनन के सक्षम नहीं है | महिला पूरी तरह से ठीक है और उपजाऊ (प्रजनन में सक्षम ) है | पुरुष में शक्राणुओं की उपलब्धता कम होने के कारण वह महिला के अंडे में प्रवेश नहीं कर सकता |

दूसरा कारण यह है की पुरुष में शक्राणु तो है लेकिन उनकी गुणवत्ता अच्छी नहीं है | अच्छी गुणवत्ता के शक्राणु गतिशील होते है और महिला के गर्भधराम में प्रवेश करते ही वह खुद–ब–खुद अंडे तक पहुंच जाते है | अगर पुरुष के शक्राणु अच्छी गुणवत्ता के नहीं है तो वो कम गतिशील होंगे और फिर उनमे इतनी क़ाबलियत भी नहीं होगी की वह अंडे तक पहुंच सकें और भ्रूण बनाने में अपना योगदान से सकें |

तीसरा कारण है की अगर शकरणुओं की गुणवत्ता भी अच्छी है और उपलब्धता भी बहुत है तो इस स्थिति में एक ही कारण बचता है की पुरुष के प्रजनन अंग के अंदर शकरुणों के परिवहन पर कोई रोक है | पुरुष के किसी चोट के कारण , किसी शल्य–चिकत्सा के कारण या फिर किसी और किसम के दवाब के कारण नलिकों में रुकावट पड़ती है | संकलन के समय शक्राणु बहार नहीं आ पते और पुरुष को बाँझपन की समस्या पेश आती है |

यह तीन कारण ऐसे है जो जायदातर देखने को मिलते है | इनके इलावा कई ऐसे और कारण भी है जो बहुत कम लोगों में देखने को मिलते हैं |

पारिवारिक कारण – कई मामलों में परिवारों में किसी हार्मोन समस्या के कारण बाँझपन की समस्या सभी पुरषों में होती है | इसका उपकाहर काफी लम्बा होता है |

पौरुष ग्रंथि जिस के अंदर वीर्य संग्रह / एकत्रित किया जाता है , उस के अंदर किसी विकार के कारण पुरुष संखलान के समय पीड़ा मेहसूस करता है और पूरी तरह से संखलित नहीं हो पाता |

पुरुष नसबंदी – अगर पुरुष की नसबंदी की हुई है तो वह पक्के तौर पर बाँझ बन चूका है | उसके शल्य–चिकत्सा के बाद भी बहुत कम मौके है की वह पिता बन सकेगा |

समय से पहले या बहुत जल्दी संखलित हो जाना , यह भी बाँझपन का एक बड़ा कारण है और इसे शीघ्रपतन भी कहा जाता है |

अगर पुरुष के प्रजनन अंग में शक्राणुओं बिलकुल भी नहीं है और या फिर वह तनाव पाने में ही असमर्थ है इसके कारण भी गर्भधरण ने समस्या आ सकती है |

अनियमित संभोग – महिला के कुछ खास दिन होते है जिनमे गर्भधारण के मौके होते हैं , अगर पुरुष उन दिनों में सम्बन्ध नहीं बनता तो वह गर्भधारण करने में असफल रहता है |

रीड की हड्डी की चोट पुरुष प्रजनन पर बहुत बुरा असर करती है , जायदातर मामलो में तो पुरुष सम्भोग के सक्षम ही नहीं रहता |

पहले की किसी बड़ी चिकत्सा के कारण भी पुरुष की प्रजनन शक्ति पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है | अगर कोई दवाई अपना उल्टा परभाव दिखा दे तो भी पुरुष की प्रजनन शक्ति खतरे में पड़ सकती है | इनसे खास सावधानी बरतने की जरूरत होती है |

उपचार –

जितनी जल्दी हो सके किसी अच्छे चिकत्सक से सम्पर्क करना किये क्यूंकि समय पर उपचार अच्छे नतीजे प्रदान करता है | सबसे पहले चित्सक आपको काफी सारे टेस्ट करवाने को बोलेगा , जिससे पता लगया जा सकेगा की समस्या कहाँ पर है और वयक्ति को किस करण से बाँझपन का रोग है | उसके बाद वह यह तय करेगा की किस तकनीक से आपका उपचार होगा |

सबसे पहले आपके शरीरक परीक्षण किया जायेगा की आपके शरीर की प्रजनन समस्या क्या है , या आपको किस कारण से बाँझपन का रोग है | इसके साथ ही आपके परिवार का चिकत्सा का इतहास भी पूछा जायेगा की आपके परिवार में से किसी को ऐसी समस्या थी या नहीं . क्यूंकि इस समस्या में परिवारिक करण बहुत प्रभाव रखते है | किसी प्रकार की पुराणी चोट या अन्य बड़ी चिकत्सा के बारे मे भी जानकारी ली जाएगी |

वीर्य परीक्षण – इसमें देखा जायगा की अपने वीर्य की गुणवत्ता कैसी है | वीर्य की गुणवत्ता एक खास कारण है , जो मर्दों को बाँझ बनता है |

शक्राणुओं की गति–शीलता और योग्यता खोजने के बाद आपकी अल्ट्रसाउंड करके शरीर के अंदर से प्रजनन अंगों की जानकारी ली जाएगी | उनमे किसी प्रकार के विकार , दवाब और चोट अदि के बारे में विस्तार से अध्यन किया जायेगा |

हॉर्मोसन की जेकरि और उनके कम करने की योग्यता को परखने के लिए रक्त को की परीक्षित किया जाएगा | रक्त के परीक्षण से अनुवांशिकी बिमारियों का भी पता चल सकगा |
शुक्राणु बनने की समस्या
बहुत कम शुक्राणू या बिलकुल नहीं।

अण्डे तक पहुंच कर उसे उर्वर बनाने में शुक्राणु की असमर्थता –
शुक्राणु की असामान्य आकृति या बनावट उसे सही ढंग से आगे बढ़ पाने में रोकती है।

जन्मजात समस्याएं
कई बार पुरूषों में जन्मजात ऐसी समस्या होती है जो कि उनके शुक्राणुओं को प्रभावित करती है। अन्य सन्दर्भों में किसी बीमारी या चोट के परिणाम स्वरूप समस्या शुरू हो जाती है।

बन्ध्यता के कारण
पुरूष के सम्पूर्ण स्वास्थ्य एवं जीवन शैली का प्रभाव शुक्राणुओं की संख्या और गुणवत्ता पर प्रभाव पड़ता है। जिन चीज़ों से शुक्राणुओं की संख्या और गुणवत्ता घटती है उस में शामिल हैं – मदिरा एवं ड्रग्स, वातावरण का विषैलापन जैसे कीटनाशक दवाएं, धूम्रपान, मम्पस का इतिहास, कुछ विशिष्ट दवाँएं तथा कैंसर के कारण रेडिएशन।

औरतों में अनुर्वरता के कारण हैं – अण्डा देने में कठिनाई, बन्द अण्डवाही ट्यूबें, गर्भाशय की स्थिति की समस्या, युटरीन फाइवरॉयड कहलाने वाले गर्भाशय के लम्पस। बच्चें को जन्म देने में बहुत सी चीजें प्रभाव डाल सकती हैं। इनमें शामिल हैं, बढ़ती उम्र, दबाव, पोषण की कमी, अधिक वजन या कम वजन, धूम्रपान, मदिरा, यौन संक्रमिक रोग, हॉरमोन्स में बदलाव लाने वाली स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएं।

यौनपरक संक्रमण से अनुर्वरकता
यौनपरक संक्रमण के कारणभूत जीवाणु गर्भाशय और ट्यूबों की ग्रीवा में प्रवेश पा सकते हैं और अण्डवाही ट्यूबों के अन्दर की त्वचा को अनावृत (नंगा) कर देते हैं हो सकता है कि अन्दर पस बन जाए। एन्टीबॉयटिक बगैरह खा लेने से यदि वह ठीक भी हो जाए तो भी हो सकता है कि ट्यूब के अन्दर की नंगी दीवारें आपस में जुड़कर टूयूब को बन्द कर दें और अण्डे को या वीर्य को आगे न बढ़ने दें सामान्यतः गर्भ धारण के लिए अण्डा और वीर्य ट्यूबों में मिलते हैं तो उर्वरता होती है।

अधिक आयु
बच्चे को जन्म देने की सम्भावनाएं बढ़ती उम्र के साथ निम्न कारणों से घटती है

उर्वरण के लिए तैयार अण्डे के निष्कासन की सामर्थ्य में बढ़ती उम्र के साथ कमी आ जाती है।
बढ़ती उम्र के साथ ऐसी स्वास्थ्यपरक समस्याएं हो सकती है जिनसे उर्वरकता में बाधा पड़े।
साथ ही गर्भपात की सम्भावनाएं भी बहुत बढ़ जाती हैं।
चिकित्सा आरंभ
अधिकतर ३० से कम उम्र वाली स्वस्थ महिला को गर्भधारण की चिन्ता नहीं करनी चाहिए जब तक कि इस प्रयास में कम से कम वर्ष न हो जाए। 30 वर्ष की वह महिला जो पिछले छह महीने से गर्भ धारण का प्रयास कर रही हो, गर्भ धारण न होने पर जल्द से जल्द डॉक्टर से परामर्श ले। तीस की उम्र के बाद गर्भ धारण की सम्भावनाएं तेजी से घटने लगती है। उचित समय पर और पूर्ण उर्वरकता के लिए अपनी जाँच करवा लेना महत्त्वपूर्ण होता है। अनुर्वरकता का इलाज कराने वाले दो तिहाई दम्पत्ति सन्तान पाने में सफल हो जाते हैं।

पुरूषों के परीक्षण
पुरूषों के लिए, डॉक्टर सामान्यतः उसके वीर्य की जांच से शुरू करते हैं वे शुक्राणु की संख्या, आकृति और गतिविधि का परीक्षण करते हैं। कई बार डॉक्टर पुरूष के हॉरमोन्स के लैवल की जांच की भी सलाह देते हैं।औरतों में बाँझपन की समस्या का प्रमुख कारण है ट्यूबों का बंद होना अंडा न बनना या फिर बच्चेदानी में नुक्स होना , रसोलियाँ होना या फिर बचे दानी का साइज छोटा होना।

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